कैबिनेट बैठक में लिया गया अहम फैसला, स्थानीय संवेदकों को प्राथमिकता देने का निर्णय

कैबिनेट बैठक में लिया गया अहम फैसला, स्थानीय संवेदकों को प्राथमिकता देने का निर्णय

Key Decision Taken in Cabinet Meeting

Key Decision Taken in Cabinet Meeting

पटना। Key Decision Taken in Cabinet Meeting, बिहार सरकार ने रोजगार बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए राज्य के स्थानीय संवेदकों को प्राथमिकता देने का फैसला किया है। सात निश्चय-3 योजना के तहत यह प्रस्ताव लाया गया है, जिसमें अगले पांच वर्षों में एक करोड़ रोजगार के अवसर सृजित करने का लक्ष्य रखा गया है। बुधवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया।

बैठक के बाद कैबिनेट के अपर मुख्य सचिव अरविंद चौधरी ने बताया कि सरकार का स्पष्ट उद्देश्य है कि राज्य के विकास कार्यों का लाभ सीधे बिहार के लोगों को मिले। इसी के तहत बिहार लोक निर्माण संहिता में कंडिका-163 (ए) जोडऩे का निर्णय लिया गया है। 

नए प्रविधान के अनुसार, 25 लाख रुपये से अधिक और 50 करोड़ रुपये तक की लागत वाले सिविल कार्यों में राज्य स्तरीय संवेदकों को अधिमानता दी जाएगी।

स्थानीय ठेकेदारों को अधिक अवसर मिलेंगे

इस फैसले से स्थानीय ठेकेदारों को अधिक अवसर मिलेंगे, जिससे रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे और राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। साथ ही, बाहरी कंपनियों पर निर्भरता कम होगी और परियोजनाओं का क्रियान्वयन भी तेजी से हो सकेगा। 

सरकार का मानना है कि यह कदम न केवल युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा, बल्कि लोकल को वोकल बनाने की दिशा में भी अहम साबित होगा।

ग्रामीण सड़कों पर पुल निर्माण में बड़ा बदलाव, अब योजनावार होगी निविदा

मंत्रिमंडल ने मुख्यमंत्री ग्रामीण सेतु योजना में एक अहम बदलाव किया है। बदलाव से ग्रामीण क्षेत्रों में संपर्क व्यवस्था और बेहतर हो सकेगी। पहले इस योजना के तहत पुल निर्माण के लिए कार्य प्रमंडल या अवर अनुमंडल स्तर पर कई योजनाओं को मिलाकर एक पैकेज बनाकर निविदा निकाली जाती थी। लेकिन अब इस व्यवस्था में संशोधन किया जा रहा है।

संशोधन के तहत अब हर योजना के लिए अलग-अलग निविदा (टेंडर) जारी की जाएगी। यानी हर पुल या सेतु का काम स्वतंत्र रूप से कराया जाएगा। इससे कार्य में पारदर्शिता बढ़ेगी और छोटे ठेकेदारों को भी भाग लेने का मौका मिलेगा। 

सरकार का मानना है कि इस बदलाव से काम की गति तेज होगी और ग्रामीण क्षेत्रों में निर्बाध संपर्कता सुनिश्चित होगी। यह कदम ग्रामीण विकास को नई गति देने में सहायक साबित हो सकता है।